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संस्कृत ववभाग , कन्या महा ववद्यालय , जालन्धर संस्था की स्थापना के साथ ही सन् १८८६ से ही संस्थावपत है ।कन्या महाववद्यालय तभी से वनरन्तर संस्कृत की छात्राओं को बैचलर ऑफ आर्टसस में संस्कृत इलैवटिव ववषय का चयन करती हैं उन्हें महाववद्यालय की ओर से प्रवतवष ववविष्ट छात्रवृवि प्रदान की जाती है । सन् १८८६ से ही महाववद्यालय संस्कृत के प्रचार – प्रसार के वलए कटिबद्ध है । संस्कृत ववभाग ने वषस २००६ में युवनवर्ससिी ग्ांिकमीिन , नई ददल्ली द्वारा प्रयोवजत ” गीता ज्ञान : आधुवनक जीवन के सन्दभस में ” वद्वददवसीय राविय संगोष्ठी प्रायोवजत की थी । यह कन्या महाववद्यालय, जालन्धर की यू.जी.सी. प्रायोवजत प्रथम राविय संगोष्ठी थी । इस सेवमनार में सवसप्रथम हवन का आयोजन, श्रीमद्भगवद्गीता से सम्बवन्धत पात्रों की फै न्सी ड्रैस प्रवतयोवगता, गीता से सम्बवन्धत वचत्रकला प्रवतयोवगता, ई-गीता प्रवतयोवगता ऑन कम््यूिर, राविय स्तर के प्रवतष्ठा को प्राप्त संस्कृत ववद्वानों के ज्ञानवधसक व्याख्यान, काव्य सम्मेलन, िविपीठ श्रीदेवीतालाब मवन्दर में सभी ववद्वानों का नतमस्तक होना एवं िविपीठ से आिीवासदप्रावप्त , अव्वल -अल्लाह – नूर – उपाया कुदरत दे सब बन्दे – एक नूर ते सब जग उपजया कौन भले कौन मन्दे ” संगीत ववभाग की प्रस्तुवत से इस सेवमनार का सम्पन्न होना आज भी अववस्मरणीय पलों को साक्षात् उपवस्थत करता है । राविय स्तर पर बहुत से ववद्वानों के एटस्िैंिन लैटचर करवाना कन्यामहाववद्यालय की प्रप्रसीपल मैडम के प्रोत्साहन और भारतीय संस्कृवत के प्रवत दृढ आस्था को द्योवतत करता है । वषस २००८ से आिुतोष आंवगरस जी के अथक प्रयासों से प्रोफेसर वगरीिनाथ झा सर के सहयोग से प्रथम कम््यूिेिनल संस्कृत की एकददवसीय कायसिाला कन्या महाववद्यालय, जालन्धर के कम््यूिर साईंस ववभाग में आयोवजत की गई । वजसमें पंजाब के सभी प्राध्यापक एवं प्राध्यावपकाओं ने सहषस प्रवतभावगता की । प्रप्रसीपल मैडम के अत्यन्त रुवच एवं संस्कृत के प्रवत समपसण भाव होने से ही सम्पूणस कन्या महाववद्यालय का िीप्रचग एवम् नान िीप्रचग स्िाफ एकवत्रत होकर संस्कृत ववभाग प्रत्येक ईवनविएटिव को सफलता के चरमोत्कषस तक पहुुँचाते हैं । कन्या महाववद्यालय के संस्कृत के क्षेत्र में संस्कृत सावहय का अध्ययन, अध्यापन एवं इसी ववषय में प्रथम बार में ही यू.जी.सी. नेि की परीक्षा उिीणस करने के साथ िेक्नोलोजी के साथ भी कदम से कदम वमलाकर वनरन्तर अग्सर होने की ओर वनरन्तर कायसरत है । छात्राएुँ भी छोिे – छोिे प्रोजैटि जैसे – संस्कृत – िाईप्रपग, पॉवर – ्वाईंि- प्रैसेन्िेिन, बाई – वलवन्ववल- वडटिनरी , वायवा , इन्िर्सवयू – वस्कल , ओनलाईन असाईनमैन्ि यह सब अभ्यास वडसीपलस ्पैवसदफक – कोसस के अवतटरि इन सभी का अभ्यास करवाया जाता है । संस्कृत ववभाग की प्राध्यावपका ने भी संस्कृत की िाईप्रपग में वनपुणता प्राप्त कर छात्राओं की भी इसमें वनपुण बनाने का प्रयास वनरन्तर गवतमान है । यू. जी.सी प्रायोवजत टरसचस प्रौजैटि – ” अवभराज राजेन्रप्रणीत संस्कृत कथा सावहत्य का समीक्षात्मक अध्ययन” भी संस्कृत ववभाग द्वारा सम्पन्न हो चुका है । वन वीक ” कम््यूिेिनल संस्कृत फ़ॉर कैटरयर अनहांसमैि” कायसिाला का आयोजन दकया गया । ” कम््यूिेिनल संस्कृत एवम् ववमेन ऎम्पावरमैण्ि ” ववषय पर जवाहरलाल नेहरु यूवनवर्ससिी के संयुि तत्त्वावधान में सप्ताह पयसन्त इन कायसिालाओं का आयोजन दकया गया । इसके अवतटरि महर्सष सान्दीपवन राविय वेद ववद्या प्रवतष्ठान , उज्जैन , मध्यप्रदेि के संयुि तत्त्वावधान में प्रायोवजत ” वैददक वाड्.मय में भावय एवं पुरुषाथस ” वद्वददवसीय वैददक संगोष्ठी का आयोजन एवं वेदों में आदिस समाज की अवधारणा ” ववषय पर वद्वददवसीय राविय वैददक संगोष्ठी का आयोजन दकया गया । ” सौ वैददक कक्षाओं का आयोजन ” जो कन्या महाववद्यालय के सभी ववभागों के संयुि तत्त्वावधान में दकया गया । सेवमनार का आयोजन भी आयोजकों एवं प्रवतभावगयों को अध्ययन एवं िोध दोनों की ओर प्रवृि करता है । संस्कृत ववभाग कन्या महाववद्यालय को इन ववषयों पर अध्ययन एवं िोध करने का सुअवसर प्राप्त हुआ ।
Attractive blackboard handwriting of the student. Very good talent of the student by presenting Gayatri Mantra.
Name – Riya Sharma
Class – M.Com ( FYIP, Semester-I)
Roll No. – 2411066.


Ms Ranina Presenting the Sanskrit Famous Song Written and Sung by Ramakant Shukal ji and written in its own handwritting too.
